गलफरबाड़ी के भूमि हस्तांतरण का है मामला
रेलवे ने उपायुक्त से मांगा स्पष्ट एस्टीमेट
धनबाद । जिला प्रशासन द्वारा किए गए अस्पष्ट पत्राचार ने रेलवे को संशय में डाल दिया है। मामला ग्यारहकुंड अंचल के गलफरबाड़ी मौजा का है । रेलवे के मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट के लिए भूमि हस्तांतरण मामले में जिला प्रशासन द्वारा दो तरह की राशि की मांग की गई है, जबकि जमीन का कुल रकवा भी स्पष्ट नहीं है । इसे लेकर रेलवे ने उपायुक्त को पत्र लिखकर कर राशि एवं जमीन का रकवा स्पष्ट करने की मांग की है।
धनबाद जिले के एग्यारकुंड अंचल अंतर्गत गलफरबाड़ी मौजा में रेलवे के महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट के लिए सरकारी जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया ने अब जोर पकड़ लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर पूर्व रेलवे के आसनसोल स्थित उप मुख्य अभियंता (निर्माण) कार्यालय ने धनबाद उपायुक्त को औपचारिक पत्र भेजकर भूमि हस्तांतरण और उससे जुड़ी वित्तीय मांगों पर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है। यह पूरा मामला सोन नगर-अंडाल रेल खंड के विस्तार से जुड़ा है, जो पहले डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का हिस्सा था और अब रेलवे के सीधे नियंत्रण में विकसित किया जा रहा है।
रेलवे क्यों है संशय में :
रेलवे द्वारा प्रशासन को भेजे गए पत्र के अनुसार, इस परियोजना के लिए पूर्व में अक्टूबर 2023 के दौरान 4,03,78,066 रुपये की मांग रखी गई थी। हालांकि, बाद में डीएफसीसीआईएल (DFCCIL) प्राधिकरण द्वारा इस अनुमानित राशि में सुधार का अनुरोध किया गया, जिसके बाद 2,92,43,230 रुपये की संशोधित मांग सामने आई है। रेलवे ने अब जिला प्रशासन से यह आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या यह नई राशि पुरानी मांग के स्थान पर तय की गई है। इसके साथ ही रेल विभाग ने इस बात पर भी ध्यान आकृष्ट कराया है कि अब तक प्राप्त मांग पत्रों में हस्तांतरित होने वाली जमीन के सटीक रकबे यानी क्षेत्रफल का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, जो पारदर्शी रिकॉर्ड-कीपिंग और परियोजना की प्रगति के लिए अनिवार्य है।
पत्राचार के माध्यम से रेलवे ने धनबाद उपायुक्त से अनुरोध किया है कि जमीन के वास्तविक रकबे को शामिल करते हुए एक विस्तृत और अंतिम एस्टीमेट जल्द उपलब्ध कराया जाए। इसके अतिरिक्त, रेलवे ने इस भूमि के हस्तांतरण के लिए अविलंब ‘राज्यदेश’ (सरकारी आदेश) जारी करने की मांग की है। विभाग का प्रस्ताव है कि यह आदेश सीधे पूर्व रेलवे के पक्ष में जारी किया जाए। यदि तकनीकी कारणों से इसमें कोई बाधा हो, तो इसे डीएफसीसीआईएल के पक्ष में जारी करने का विकल्प भी दिया गया है, क्योंकि भूमि हस्तांतरण की प्रारंभिक प्रक्रिया उसी एजेंसी के माध्यम से शुरू हुई थी।

