धनबाद के सिजुआ एरिया संख्या 5 अंतर्गत बांसजोरा और निचितपुर ओपन कास्ट माइनिंग में हो रही भारी ब्लास्टिंग ने स्थानीय ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर की जा रही माइनिंग और ब्लास्टिंग के खिलाफ अब ग्रामीणों ने सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि 21 मई 2025 को हुई भारी ब्लास्टिंग के दौरान उड़कर आए पत्थर उनके घरों पर गिरे जिससे मकानों में दरारें आ गई हैं और कई लोग बाल-बाल बचे हैं। इस घटना में कई लोगों के घायल होने की भी खबर है लेकिन बीसीसीएल प्रबंधन कोयला उत्पादन के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है।पत्र में उल्लेख किया गया है कि माइनिंग क्षेत्र के पास स्थित तालाब के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है। भारी ब्लास्टिंग के कारण तालाब कभी भी धंस सकता है जिससे क्षेत्र में बड़ा जल संकट पैदा होने की आशंका है। इसके अलावा माइनिंग से निकलने वाली धूल और कचरे को तालाब के पास डंप किया जा रहा है जिससे पानी और हवा दोनों प्रदूषित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण अधिनियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है और बड़ी संख्या में पेड़ों को भी नष्ट कर दिया गया है। प्रदूषण और खतरे के कारण क्षेत्र के बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।ग्रामीणों ने प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन को पहले भी कई बार लिखित शिकायत दी है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसके उलट शिकायत करने पर ग्रामीणों के खिलाफ ही धारा 107 और 144 के तहत मामले दर्ज कर उन्हें डराने का प्रयास किया जा रहा है। पत्र में बांसजोरा और लोयाबाद को जोड़ने वाली सड़क पर हो रहे गैस रिसाव का भी जिक्र किया गया है जिससे स्कूली बच्चों और राहगीरों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। बद्री नाथ रवानी और अन्य ग्रामीणों ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि उनके जीवन और संपत्ति की रक्षा की जाए और पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन करने वाली कंपनी पर सख्त कार्रवाई हो।

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