उच्च स्तरीय बैठक के लिए अबतक तिथि निर्धारित नहीं

धनबाद । केंदुआडीह में जिला प्रशासन की ओर से अब एक नया प्रयास किया जा रहा है ।जिला प्रशासन केंदुआ में अतिक्रमण हटाने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद दिख रहा है, तो दूसरी तरफ गैस रिसाव और भू-धंसान से जूझ रहे हजारों लोगों के पुनर्वास और उनकी जान बचाने के मामले में पूरी तरह उदासीन है। प्रशासन की प्राथमिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अतिक्रमण हटाने के लिए उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर बैठकें बुलाने के लिए पत्र लिखी जा रही हैं, लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए बुलाई गई आपदा प्रबंधन की महत्वपूर्ण बैठक को बिना किसी ठोस कारण के स्थगित कर दिया गया है। दरअसल अनुमंडल पदाधिकारी ने उपायुक्त को पत्र लिखा है कि मौजा-केंदुआडीह (मौजा संख्या-63) के अंतर्गत अतिक्रमण हटाने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती और दंडाधिकारी की नियुक्ति की जाए। दिलचस्प बात यह है कि इस कार्रवाई के लिए प्रशासन तत्पर है, लेकिन जब बात गैस रिसाव से प्रभावित परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास की नीति बनाने की आती है, तो सारा तंत्र ठंडे बस्ते में चला जाता है। केंदुआडीह के राजपूत बस्ती और नया धौड़ा के लोग पिछले कई महीनों से मौत के साए में जी रहे हैं, लेकिन अभी तक उनके पुनर्वास के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनी है।
अतिक्रमण पर कार्रवाई, सुरक्षा पर ‘खामोशी
जनवरी में मुख्य सचिव और डीजीपी के दौरे के समय बड़े-बड़े वादे किए गए थे। बीसीसीएल प्रबंधन ने भी 21 जनवरी को डीसी को पत्र लिखकर खतरे की घंटी बजाई थी, लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है। निगम चुनाव के दौरान प्रशासनिक उदासीनता और भी बढ़ गई। हाल ही में जब प्रशासन ने मुख्य सड़क बंद की, तो विधायक के धरने के बाद 2 मई को एक उच्च स्तरीय बैठक तय हुई थी, लेकिन अब उसे भी रद्द कर दिया गया है। बैठक की अगली कोई तारीख तक निर्धारित नहीं की गई है, जिससे स्थानीय लोग अब प्रशासन पर भरोसा खो चुके हैं। प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के लिए तो हाई कोर्ट के आदेश तुरंत याद आते हैं, लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए कोई भी बैठक गंभीर नहीं लगती। केंदुआडीह में गैस रिसाव और भू-धंसान से पीड़ित परिवारों के लिए आज तक कोई पुनर्वास नीति नहीं बनी, जबकि उन्हें हर पल मौत का खतरा सता रहा है।
