पीएमओ की निगरानी वाले रेलवे प्रोजेक्ट में फंसा पेंच

जमीन के ‘राज्यादेश’ के लिए जिला प्रशासन को रिमाइंडर
निरसा अंचल के तीन मौजों में काम प्रभावित, रेलवे ने उपायुक्त को लिखा पत्र
धनबाद । प्रधानमंत्री कार्यालय की प्राथमिकता सूची में शामिल ‘सोन नगर-अंडाल मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट’ (पूर्व में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) जमीन की तकनीकी अड़चनों के कारण रुका हुआ है। निरसा अंचल के अंतर्गत आने वाली ‘गैर-मजरूआ जंगल-झाड़ी’ भूमि पर ‘राज्यादेश’ जारी न होने से निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस संबंध में पूर्वी रेलवे, आसनसोल के उप मुख्य अभियंता (निर्माण) ने धनबाद के उपायुक्त को पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया है। परियोजना के लिए निरसा अंचल के तीन प्रमुख मौजों में जमीन की आवश्यकता है:
बड़ा अंबोना मौजा: यहाँ 0.347 हेक्टेयर भूमि के लिए स्टेज-I और स्टेज-II की वन विभाग की मंजूरी क्रमशः 30.12.2022 और 22.06.2023 को ही मिल चुकी है।
कलुबथान व मरमा मौजा: इन क्षेत्रों में कुल 1.6519 हेक्टेयर भूमि लंबित है। गौरतलब है कि इसके लिए शुरुआती मंजूरी 2017 और 2020 में ही मिल गई थी, लेकिन अंतिम आदेश (राज्यादेश) अब तक प्रतीक्षित है।
दौड़ लगा रहे अधिकारी, पर समाधान नहीं
रेलवे का कहना है कि परियोजना की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अधिकारी कई बार समाहरणालय के चक्कर लगा चुके हैं। बार-बार किए गए अनुरोध के बावजूद अब तक मसला हल नहीं हुआ है। रेलवे ने पत्र में स्पष्ट किया है कि जब तक जिला प्रशासन की ओर से राज्यादेश जारी नहीं होता, तब तक रेलवे आधिकारिक तौर पर ‘वर्किंग परमिशन’ के लिए आवेदन नहीं कर सकता।
पीएमओ कर रहा है सीधी मॉनिटरिंग :
इस परियोजना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी प्रगति की निगरानी खुद प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा नियमित रूप से की जा रही है। रेलवे ने जिला प्रशासन को बताया है कि साइट वर्तमान में पूरी तरह से अवरोध मुक्त है और निर्माण कार्य प्रगति पर है, लेकिन भूमि संबंधी तकनीकी आदेश की कमी इस राष्ट्रीय प्रोजेक्ट की समय सीमा में बड़ी बाधा बन रही है।
