
धनबाद । धनबाद की राजनीति में सोमवार को लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के उद्घाटन ने विकास का प्रतीक बनने के बजाय सांसद ढुल्लू महतो की व्यक्तिगत सत्ता-लोलुपता का नंगा चेहरा उजागर कर दिया। नगर निगम मेयर चुनाव में सांसद ने निर्दलीय प्रत्याशी संजीव सिंह को “माफिया” करार देते हुए खुली धमकी दी थी कि उनकी जीत से शहर में अशांति फैलेगी। लेकिन जनता ने सांसद की इस आक्रामक बयानबाजी को ठुकरा दिया। संजीव सिंह ने रिकॉर्ड 1.14 लाख वोटों से भारी जीत हासिल की। यह ढुलू महतो की स्थानीय पकड़ और अहंकार पर पहला बड़ा झटका था।
फिर आया ट्रेन उद्घाटन का मौका। रेलवे ने 3 अप्रैल को मेयर संजीव सिंह और झरिया विधायक रागिनी सिंह को औपचारिक निमंत्रण भेजा, बैनर-पोस्टर भी लगे। लेकिन कार्यक्रम से महज 1-3 घंटे पहले निमंत्रण रद्द कर दिया गया। बैनर बदल दिए गए। सांसद महतो ने खुद प्लेटफॉर्म पर हरी झंडी दिखाई, इंजन पर चढ़े और कतरास तक महिला बॉगी में चढ़कर ट्रेन में यात्रा की। रेलवे ने बाद में “गलती” मानते हुए मेयर निवास सिंह मेंशन जाकर माफी मांगी। यह कोई गलती नहीं, बल्कि महतो की प्रत्यक्ष दखल और दबाव की राजनीति का नतीजा था।
ढुल्लू महतो की यह हरकत धनबाद के लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। वे सांसद हैं, न कि क्षेत्र के मालिक। चुने हुए मेयर को इस तरह अपमानित करना न केवल स्थानीय जनप्रतिनिधियों का अपमान है, बल्कि भाजपा की आंतरिक एकता पर भी घातक हमला है। निगम चुनाव में हार के बाद महतो ने सबक लेने के बजाय बदला लेने का रास्ता चुना। इससे पार्टी में गुटबाजी बढ़ी है, विपक्ष को मुद्दा मिल गया है और धनबादवासियों का विकास छोड़कर व्यक्तिगत अहंकार हावी हो गया।
सांसद महतो को याद रखना होगा—धनबाद कोयला बेल्ट है, यहां “माफिया” लेबल नहीं, बल्कि जनता का विश्वास चलता है।
