धनबाद सीओ रामप्रवेश कुमार ने दिया शो कॉज का जवाब

संदिग्ध ऑनलाइन जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई शुरू

सीओ ने बीएलआर एक्ट की धारा 4(एच) के तहत जारी किया नोटिस

धनबाद। दुहाटांड़ मौजा की 42 डिसमिल सरकारी जमीन को ऑनलाइन भू-अभिलेख में निजी नाम पर दर्ज किए जाने के मामले में धनबाद सदर अंचल कार्यालय ने कार्रवाई शुरू कर दी है। संदिग्ध जमाबंदी को रद्द करने के लिए अंचलाधिकारी ने संबंधित रैयत-जमाबंदीदार निमाय कुमार चक्रवर्ती, पिता रघुपति चक्रवर्ती को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई बिहार भूमि सुधार अधिनियम (BLR Act), 1950 की धारा 4(एच) के तहत शुरू की गई है। अंचल अधिकारी धनबाद सदर की ओर से उपायुक्त को भेजे गए स्पष्टीकरण पत्र में पूरे मामले की जानकारी दी गई है। पत्र में बताया गया है कि दुहाटांड़ मौजा में खाता संख्या 39 के पुराने प्लॉट संख्या 577 का वर्तमान खाता संख्या 238 और वर्तमान प्लॉट संख्या 532 है। संबंधित भूखंड का रकबा 42 डिसमिल है। विभागीय स्तर से इस जमीन पर अवैध कब्जे से संबंधित शिकायत पर स्पष्टीकरण मांगा गया था।

पहले ही कराई जा चुकी है जांच

अंचलाधिकारी ने बताया है कि कार्यालय के पत्रांक 985, दिनांक 8 जून 2026 के माध्यम से दुहाटांड़ के उक्त 42 डिसमिल भूखंड से संबंधित जांच प्रतिवेदन कार्यालय में समर्पित किया गया था। इसके बाद ऑनलाइन भू-अभिलेख में दर्ज जमाबंदी को लेकर भी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
पत्र के अनुसार झारभूमि ऑनलाइन पोर्टल पर पंजी-II के भाग-2 में वर्तमान-01, पृष्ठ संख्या 323 पर संबंधित जमाबंदी दर्ज है। इस जमाबंदी को संदिग्ध मानते हुए इसे निरस्त करने के लिए निर्देश प्राप्त हुआ। इसके बाद अंचल कार्यालय ने 20 जुलाई 2026 को अभिलेख खोलकर कार्रवाई शुरू की।

निमाय कुमार चक्रवर्ती को नोटिस

अंचल कार्यालय ने ऑनलाइन दर्ज जमाबंदी को रद्द करने की प्रक्रिया के तहत संबंधित रैयत-जमाबंदीदार निमाय कुमार चक्रवर्ती, पिता रघुपति चक्रवर्ती को नोटिस जारी किया है। नोटिस में बीएलआर एक्ट, 1950 की धारा 4(एच) के तहत कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले अंचल निरीक्षक की जांच में भी सामने आया था कि संबंधित 42 डिसमिल जमीन सरकारी भूमि से जुड़ी है, जबकि ऑनलाइन पंजी में यह निजी नाम पर दर्ज है। जांच रिपोर्ट में मूल जमाबंदी को भी संदिग्ध बताया गया था। ऐसे में अब अंचल कार्यालय द्वारा शुरू की गई कानूनी कार्रवाई इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ऑनलाइन रिकॉर्ड में सरकारी जमीन निजी नाम पर कैसे हुई दर्ज?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस जमीन को सरकारी भूमि बताया जा रहा है, वह झारभूमि ऑनलाइन पोर्टल के पंजी-II में निजी व्यक्ति के नाम कैसे दर्ज हो गई। अंचल कार्यालय के स्पष्टीकरण में ऑनलाइन जमाबंदी को संदिग्ध मानते हुए उसे रद्द करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की पुष्टि की गई है। अंचलाधिकारी ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित ऑनलाइन प्रविष्टि, जमाबंदी तथा उस पर लगान भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। सरकारी जमीन से संबंधित ऑनलाइन रिकॉर्ड में हुई प्रविष्टि और उसके आधार की भी पड़ताल की जा रही है।

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