डीसी के निर्देश पर सीओ से 24 घंटे में स्पष्टीकरण
42 डिसमिल सरकारी जमीन निजी नाम पर ऑनलाइन दर्ज

सरकारी भूमि का खाता-प्लॉट किस परिस्थिति में रैयत के नाम ऑनलाइन दर्ज हुआ?
धनबाद। दुहाटांड़ मौजा में करीब 42 डिसमिल सरकारी जमीन को ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड में निजी व्यक्ति के नाम दर्ज किए जाने के मामले में धनबाद सीओ रामप्रवेश कुमार को शो कॉज किया गया है। मामले में पहले अंचल निरीक्षक (सीआई) की जांच में संबंधित जमाबंदी को संदिग्ध बताते हुए सरकारी भूमि का ऑनलाइन रिकॉर्ड निजी नाम पर दर्ज होने की बात सामने आई थी। अब इस मामले में डीसी के निर्देश पर धनबाद अंचल अधिकारी रामप्रवेश कुमार से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। पत्र में राजस्व उपनिरीक्षक और अंचल निरीक्षक की रिपोर्ट उपलब्ध कराते हुए यह स्पष्ट करने को कहा है कि सरकारी भूमि से संबंधित खाता-प्लॉट की विवरणी किस परिस्थिति में किसी रैयत के नाम ऑनलाइन दर्ज की गई। पत्र में दुहाटांड़ मौजा के पूर्व खाता संख्या 39, प्लॉट संख्या 577 और वर्तमान खाता संख्या 238, प्लॉट संख्या 532 का उल्लेख करते हुए मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है। पत्र में 4 अगस्त 2026 के विभागीय पत्र का हवाला देते हुए सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से संबंधित शिकायत का भी उल्लेख है।
संदिग्ध जमाबंदी के आधार पर ऑनलाइन दर्ज हुआ सरकारी भूखंड
सीआई की पूर्व जांच रिपोर्ट में दुहाटांड़ मौजा की 42 डिसमिल जमीन को गैरमजरूआ यानी सरकारी भूमि बताया गया था। रिपोर्ट के अनुसार पुराना खाता संख्या 39 और प्लॉट संख्या 577 की यह जमीन वर्तमान रिकॉर्ड में खाता संख्या 238 और प्लॉट संख्या 532 के रूप में दर्ज है। जांच में यह भी सामने आया कि ऑफलाइन जमाबंदी संख्या 19 में कई प्लॉटों को मिलाकर कुल 7.70 एकड़ जमीन रघुपति चक्रवर्ती के नाम दर्ज थी। यह जमाबंदी रेंट फिक्सेशन केस संख्या 1169/1956-57 के आधार पर कायम होने की बात कही गई है। रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसी जमाबंदी को लेकर 15 मई 2012 को भूमि सुधार उप समाहर्ता, धनबाद ने संदिग्ध जमाबंदी की जांच का आदेश दिया था। इसके बावजूद इसी आधार से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी जमीन ऑनलाइन पंजी में निजी नाम पर दर्ज होने का मामला सामने आया। सीआई की रिपोर्ट के अनुसार ऑनलाइन पंजी के भाग संख्या एक, पृष्ठ संख्या 323 पर वर्तमान खाता संख्या 238, प्लॉट संख्या 532 और 42 डिसमिल जमीन निमाय कुमार चक्रवर्ती, पिता रघुपति चक्रवर्ती के नाम दर्ज है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह ऑनलाइन प्रविष्टि रेंट फिक्सेशन केस संख्या 1169/1956-57 के आधार पर की गई। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संदिग्ध मूल जमाबंदी के आधार पर सरकारी भूमि को ऑनलाइन पंजी में निजी नाम पर दर्ज किया गया है।
27 जनवरी 2026 को हुआ ऑनलाइन अपडेट
पत्र के अनुसार झारभूमि पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन पंजी-II की तकनीकी जांच कराई गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित पंजी का ऑनलाइन अद्यतन 27 जनवरी 2026 को किया गया था। यानी सरकारी भूमि से संबंधित उक्त रिकॉर्ड का ऑनलाइन अपडेट हाल के समय में हुआ और यह धनबाद अंचल के वर्तमान पदस्थापन अवधि के अंतर्गत आता है। इसी तथ्य को आधार बनाते हुए जिला प्रशासन ने धनबाद सीओ से पूछा है कि आखिर किस परिस्थिति में सरकारी भूमि से संबंधित खाता और प्लॉट की विवरणी किसी रैयत के नाम ऑनलाइन दर्ज कर दी गई। पत्र में राजस्व उपनिरीक्षक एवं अंचल निरीक्षक का प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के साथ सीओ को पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
राज्य मुख्यालय भी मांग चुका है जांच रिपोर्ट
इससे पहले मामले को लेकर राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की संयुक्त सचिव मंजू रानी स्वांसी ने भी धनबाद उपायुक्त को पत्र भेजकर शिकायत की जांच कराने और जांच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। शिकायत में दुहाटांड़ की 42 डिसमिल सरकारी जमीन पर कब्जे और उसे निजी नाम पर दर्ज किए जाने का आरोप लगाया गया था।
