अपर समाहर्ता ने दो दिन में मांगी जांच रिपोर्ट, 10 दिन बाद भी सीओ ने नहीं दिया जवाब
धनबाद। धनबाद अंचल के धैया मौजा में राजस्व अभिलेखों में कथित फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि करीब सात-आठ वर्ष पहले मृत हो चुके व्यक्ति के नाम वर्ष 2026 में ऑनलाइन पंजी-II में दाखिल-खारिज और जमाबंदी दर्ज कर दी गई। शिकायत मिलने पर अपर समाहर्ता प्रदीप शुक्ला ने धनबाद सीओ रामप्रवेश कुमार को मामले की जांच कर दो दिनों के भीतर अभिलेखीय साक्ष्य के साथ रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। लेकिन आदेश की समय सीमा 3 अगस्त को समाप्त होने के बाद भी 10 अगस्त तक रिपोर्ट नहीं दी गई है।
मामला धैया निवासी बिनोद मंडल समेत तीन आवेदकों की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार मौजा धैया, थाना संख्या-06 में स्व. देवेन्द्रनाथ मंडल, पिता स्व. पानु मंडल के नाम ऑनलाइन पंजी-II के भाग वर्तमान संख्या-04, पृष्ठ संख्या-345 में वर्ष 2026 में दाखिल-खारिज और जमाबंदी दर्ज की गई है। इसमें दाखिल-खारिज वाद संख्या-14 (II), वर्ष 1976-77 का उल्लेख है। इतना ही नहीं, 16 जून 2026 को वर्ष 1976-77 से 2026-27 तक का लगान भुगतान भी दर्ज दिखाया गया है। अभिलेख में कुल 57.98 डिसमिल जमीन का उल्लेख है। आवेदकों ने इस प्रविष्टि को फर्जी बताते हुए कहा है कि संबंधित जमीन पर उनका पूर्व से वैध अधिकार है। उनके अनुसार छवि मंडलानी, पति स्व. सीताराम मंडल से 27 जून 1966 को दस्तावेज संख्या-11731 के माध्यम से जमीन खरीदी गई थी। इसके बाद दाखिल-खारिज वाद संख्या-685 (II), वर्ष 1998-99 कराया गया और जमाबंदी संख्या-2419 के माध्यम से लगातार लगान का भुगतान किया जाता रहा। ऑनलाइन पंजी में भी उनका नाम दर्ज है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक जमीन के दूसरे हिस्से को उनकी दादी विकला मंडल ने वर्ष 1952 में खरीदा था। इस संबंध में भी पुराने दस्तावेज उपलब्ध हैं। उनका दावा है कि स्व. देवेन्द्रनाथ मंडल का उक्त भूमि पर कभी कोई अधिकार, दावा या कब्जा नहीं रहा। उनका निधन भी करीब सात-आठ वर्ष पूर्व हो चुका है। ऐसे में उनके नाम पर वर्ष 2026 में जमाबंदी और दाखिल-खारिज दर्ज किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अपर समाहर्ता ने दस्तावेज समेत मांगी रिपोर्ट:
शिकायत पर अपर समाहर्ता ने सीओ को उपलब्ध राजस्व अभिलेख, दाखिल-खारिज वाद, जमाबंदी अभिलेख, ऑनलाइन पंजी-II और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया था। आदेश में अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ स्पष्ट प्रतिवेदन दो दिनों के अंदर स्वयं अपर समाहर्ता के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया था, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। लेकिन निर्धारित अवधि समाप्त होने के एक सप्ताह बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आने से शिकायतकर्ताओं में नाराजगी है। अब सवाल यह है कि आखिर राजस्व रिकॉर्ड में मृत व्यक्ति के नाम जमीन की जमाबंदी किस आधार पर दर्ज हुई और इसकी जांच रिपोर्ट देने में अंचल कार्यालय को इतनी देरी क्यों हो रही है?
जांच के आदेश के बाद भी रिपोर्ट का इंतजार :
03 अगस्त — अपर समाहर्ता द्वारा निर्धारित दो दिन की समय सीमा समाप्त।
10 अगस्त — आदेश के करीब दस दिन बाद भी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं।
57.98 डिसमिल — विवादित जमीन का ऑनलाइन अभिलेख में उल्लेख।
7-8 वर्ष — शिकायतकर्ताओं के अनुसार देवेन्द्रनाथ मंडल की मृत्यु को हो चुके हैं।
1966 — शिकायतकर्ताओं के अनुसार जमीन खरीद का पुराना दस्तावेज।
1998-99 — उनके नाम दाखिल-खारिज वाद संख्या-685 (II) का उल्लेख।
